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आलेख
July 2, 2020 • Naresh Rohila • सप्तरंग

 

 

स्वदेशी वस्तुओं का इस्तेमाल ही स्वदेश की जीत   

  • सुशीलारोहिला

सर्वप्रथम नवोदित भारत की पहल सभी भारतीय को अपने मन की सोच को ही स्वदेशी बनाना होगा । फिर स्वयं सभी भारतीय स्वदेशी बन जाएंगे  और हमारा स्वदेशी सामान, वस्तुएं , वस्त्र, टैक्नोलोजी का सामान , स्वदेशी  एप आदि  सभी हमारी स्वदेशी ब्रांड से युक्त होगी  फिर  सभी  नागरिकों का चित्त चाइनिज वस्तुओं या अन्य देश की वस्तुओं के लिए इतना लालायित नहीं होगा । आजकल व्यक्ति इतना बह्रिमुखी है कि लोकल वस्तुएँ , लोकल सामान खरीदने से सकुचाता है वह सोचता है कि मंहगा और बाहर की कंपनी का हो तो वह उसको ज्यादा  खरीदना पंसंद करेगा । कुछ लोगों की धारणा यह है कि जितना कीमती सामान होगा, जितने कीमती वस्त्र होंगे, जितना कीमती मोबाइल होगा या अन्य सामान होगा समाज में उसकी प्रशंसा, चर्चा ज्यादा होगी। समाज में उसका ज्यादा रूतबा होगा और सब उसकी इज्जत करेंगे । इस सोच से भी समाज के अन्दर बनावटी जीवन जीने की कला का प्रदर्शन होता है ।और वास्तविकता से कोसो दूर हो जाता है । जीवन की वास्तविकता को ना जानने के कारण ही मानव इतना सुख साधनों का संग्रह करने पर भी अशांत है ।मेड इन इंडिया प्रधानमंत्री  भाई नरेन्द्र मोदी की एक सर्वश्रेष्ठ नवोदित भारत के बदलते युग की एक नई पहल है । 

स्वदेशी सामान स्वदेशी पहनावा , स्वदेशी भाषा, स्वदेशी रहन -सहन  स्वदेशी खान-पान , स्वदेशी शिक्षा,  स्वदेशी औजार, स्वदेशी मनोरंजन का साधन , स्वदेशी  एप , स्वदेशी  वस्त्र, स्वदेशी मोबाइल, स्वदेशी  टैक्नोलिजी आदि  का  इस्तेमाल करें  तो चीन क्या कोई भी देश अपनी शक्ति को  खो देगा । आर्थिक स्थिति कमजोर होने पर     वह अपने ही पहचान खो सकता है ।क्योंकि  जहाँ पर लक्ष्मी का वास नहीं  वहां पर विष्णु  भगवान भी ठहर नहीं  सकता । सोने की लंका ही भारत पर विजय ना सकी तो चीन की क्या हस्ती है जो भारत माता पर विजय पा सकें  ।