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ब्रज फाउंडेशन संस्थापक व पत्रकार विनीत नारायण परिवार सहित परमार्थ निकेतन आये
February 17, 2020 • Naresh Rohila • करंट अफेयर्स

एसके विरमानी /ऋषिकेश।परमार्थ निकेतन में वरिष्ठ पत्रकार, भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता और ब्रज फाउंडेशन के संस्थापक विनीत नारायण  अपने पूरे परिवार के साथ पहुंचे। विनीत नारायण  के पुत्र अज़ीज़  और पुत्रवधु श्रीमती सूर्य नन्दिनी ने अपने विवाह दिवस पर स्वामी जी का आर्शीवाद लिया। साथ ही डाॅ मीता नारायण प्रोफेसर जेएनयू नई दिल्ली (रूसी भाषा की प्रोफेसर और प्रतिष्ठित पुश्किन पदक से सम्मानित), फिल्म शूटिंग एवं छायाकार एशमित नारायण, वकील सुप्रीम कोर्ट श्री जय और श्रीमती गायत्री , श्री रजनीश कपूर और अन्य परिवार के सदस्य पधारे।
 परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती  और जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी ने श्री विनीत नारायण  से  कहा कि ब्रज फाउंडेशन के माध्यम से ब्रज भूमि के ऐतिहासिक विरासतों को संरक्षित करने का जो कार्य किया जा रहा है वास्तव में श्रेष्ठ कार्य है। स्वामी जी ने कहा कि हम सभी को मिलकर यमुना जी, राधा कुण्ड, श्याम कुण्ड की स्वच्छता पर ध्यान देना होगा साथ ही अन्य विश्व व्यापी विषयों पर चर्चा की। स्वामी जी ने ब्रज भूमि में योग, कला तथा नेचर, कल्चर और फ्यूचर को ध्यान में रखते हुये कार्य करने हेतु प्रेरित किया।
श्री विनीत नारायण जी, ब्रज फाउंडेशन के माध्यम से ब्रज मंडल के तीर्थ क्षेत्र में आने वाले मन्दिरों, कुण्डों एवं अन्य ऐतिहासिक धरोहरों को संरक्षित करने का व्यापक स्तर पर कार्य कर रहे है।
 स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि जिस प्रकार मानव को जीवित रहने के लिये श्वास की जरूरत होती है उसी प्रकार उसकी आस्था को बनाये रखने के लिये प्राकृतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासतों की जरूरत होती है। ये विरासतें मनुष्य को ईश्वरीय सत्ता से जोड़ने के लिये सीमेन्ट का काम करती है। सदियों से श्रद्धालु माँ गंगा और यमुना के तटों पर अपने मन की शान्ति के लिये आते है। अगर आने वाले दिनों में ये नदियाँ नहीं होगी तो हमारे तीर्थो का स्वरूप क्या होगा यह अत्यंत चितंन का विषय है। स्वामी जी ने कहा कि हमारी धरोहर हमारा स्वाभिमान है और हमारी संस्कृति और संस्कारों की आधारशिला है। इन्हीं धरोहरों के माध्यम से हमें मानव सभ्यता के विकास की गौरव गाथा की जानकारी प्राप्त होती है। इसके माध्यम से हम उस समय की स्थानीय कला और कौशल के विषय में जानकारी प्राप्त कर सकते है। स्वामी जी ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को हमारी गौरवमयी विरासतों से जोड़ना होगा ताकि वे अपनी जड़ों से जुड़ सके साथ ही आज की युवा पीढ़ी को दौड़ नहीं बल्कि दिशा देने की जरूरत है।
 स्वामी चिदानन्द सरस्वती  महाराज ने श्री विनीत नारायण और पूरे परिवार को आशीर्वाद स्वरूप जय गंगे अंगवस्त्र और रूद्राक्ष का पौधा प्रदान किया। तत्पश्चात सभी ने स्वाहा सेरेमनी और दिव्य गंगा आरती में सहभाग किया।