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दशहरा पर विशेष रचना
October 25, 2020 • Naresh Rohila • सप्तरंग

 

(लेखिका) 

          दशानन  

           सुशीला रोहिला, सोनीपत हरियाणा 

 

       दस शीश बलिदान हुए 

       तब एक दशानन कहलाया

        शिव भक्ति की शक्ति से

        विद्वता का मान पाया।

 

      लंकापति की योजना अपार 

      स्वर्ग तक सीढ़ी लगाने का विचार

       सागर की कड़वाहट को बदलना

       मिठास का अमृत था घोलना 

 

      अंहकार की चादर में लिपटा

       गुरु कृपा का हट गया सहारा

       मोह की दल-दल में फंसा मन

       माता सीता किया अपहरण 

       देवी के सतीत्व का बल महान

       आत्मतत्व का माता में  प्रकाश

        कुकर्म की भयानक दुर्गति से

        दशानन की सद्बुद्धि का हनन

       

        जब -जब मानव मन वासना की

       चादर में लिपटा तब -तब मोहनी

       रूप बन उसकी दुष्टता का हरण

       महाशक्ति का होता है अवतरण 

 

       चेतावनी !

        हे मानव सुनो नर हो नारी

        आत्मा का करो जागरण 

        तत्वदर्शी की जाओ शरण

        परा विद्या का हो संग

         मन रूपी रावण का हो हनन

        सद्भावना से चित्त करें कर्म 

        तबहि सब राष्ट्रभक्त बनें हम