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हाहाकारी कोरोना
September 3, 2020 • Naresh Rohila • करंट अफेयर्स

@नरेशरोहिला

कोरोना संक्रमण हर रोज बढ़ता जा रहा है। देश में भी और अपने राज्य उत्तराखंड में भी, लेकिन इसे बताना और न बताना एक बराबर ही है। इसलिए भी क्योंकि अब तो अनलॉक चल रहा है और कुछ चीजों को छोड भी दें तो काफी कुछ खुल चुका है। सरकार तो यह संदेश दे चुकी है कि अब कोरोना के साथ ही जिन्दगी की गाड़ी को आगे बढाना है, तो आम आदमी भी कोरोना महामारी को लेकर '' देखी जाएगी'' वाली स्थिति में है। हालांकि कोरोना को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) अभी भी यह कह रहा है कि भारत में खतरा खत्म नहीं हुआ। इस खतरे से बचाव के लिए सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क का उपयोग सबसे बेहतर उपाय बताया जा रहा है और सही भी यही है। मास्क और आपस में 6 फिट की दूरी कोरोना से बचने के लिए बेहद कारगर है लेकिन जब सब कुछ मजाक में लिया जा रहा हो। लोग सिर्फ इसलिए मास्क को गले का हार बनाए घूम रहे हों कि कहीं चालान न हो जाए सरकारी आदेश पर पुलिस और प्रशासन ने भी मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के उल्लघंन को सिर्फ कमाई का जरिया बना लिया तो कैसे महामारी से निपटा जा सकेगा। वास्तव में लाकडाउन के पीरियड को अलग कर दें तो अब ऐसा लग ही नहीं रहा कि कोरोना नाम की कोई संक्रामक बीमारी हमारे आसपास लगातार पांव पसार रही है और देश तथा राज्यों की सरकारें सचमुच उस बीमारी से लड रही है। लड तो अब आम आदमी रहा है। उसे पता ही नहीं कि वह कोरोना वायरस के साथ चल रहा है या फिर खुद कोरोना वायरस को ढो रहा है। सरकार छींक आते ही आइसोलेट हो जाती है। उसके दरवाजे पर नो एंट्री का बोर्ड लग जाता है लेकिन उस आम आदमी की कौन पूछे जो दिन भर महामारी का सामना कर दो वक्त की रोटी कमाने निकलता है।

कोरोना से इस वक्त हाहाकार की हालत है। बाजार में काम नहीं है। उद्योग धंधे चलने के नाम पर घिसट रहे है। जीडीपी गोते खा रही  है लेकिन फिर भी हम खुश हैं कि कोरोना से खूब लडे। यह अलग बात है कि कोरोना अभी डटा हुआ है और हमारा मुंह चिढा रहा है और हम बस रोज आंकडे बता दिखा रहे हैं।

आज का आंकडा भी जरूर देखें और पढे। छह महीने से इसकी आदत जो हो गयी।

उत्तराखंड में कोरोना के रिकार्ड 946 नये केस 

देहरादून में सबसे

ज्यादा 272

 

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