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हनुमान जयंती पर विशेष *
April 8, 2020 • Naresh Rohila • सप्तरंग

                केसरी नंदन 

         सुशीला , सोनीपत हरियाणा 

     
         मान- अभिमान का त्याग 
         नाम मिला उसको हनुमान  
        अंजनि के है लाला पवन-
         पुत्र धीर वीर बड़े बलवान 
  
       जो बाल्यकाल में सुर्य से खेला
       ऐसा खेल ना कोई दूजा खेला
       विश्व में उसने कर दिया कमाल 
       लाल -लाल है उनका आकार 

       उनके बल का तोल नहीं  
       बुद्धि का कोई मोल नहीं 
       किष्कंधा राज्य का बना मंत्री 
       राष्ट्र हित सर्वोपरि है धर्म उनका


       राम काज हेतु तजा अभिमान 
       सो योजन सागर लांघ गए
       लंका जाए सिया सुधि लाए 
       तीक्षण बुद्धि का दिया प्रमाण 

      शत्रु के आंगन में ही शत्रु घेरा
      उजाड़ दिए सब उपवन बाग
      सोने की लंका जल गई सारी 
      हनुमान की पूँछ ने लगाई आग

      सेवा भक्ति का भाव जहाँ 
      दुर्लभ ना कोई काम वहां 
      नाशत रोग मिटती पीड़ा 
      जो एक दूजे की करें सेवा

     हनुमान जयंती का यह पर्व 
     सेवा का सबको दे रहा अवसर
     घर की लक्ष्मण रेखा ना पार करो 
     कोरोना महामारी की करारी हार
     भारतमाता हो विश्व गुरु हमारी 
     चहूँदिशी मानव धर्म का प्रचार