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कविता
February 26, 2020 • Naresh Rohila • सप्तरंग

      सोच से बदले विश्व जहान

     * सुशीला रोहिला,  सोनीपत हरियाणा

     सोच में रमता नारायण, सोच जन्मती शैतान है
     ईश्वर की है अद्भुद माया, निर्मल थी तेरी काया ।
     श्वास का आना-जाना एक सा ना  हिन्दू- मूस्लिम है
     लहू का रंग लाल सभी का, अद्भुद वह कारीगर है
     माता-पिता का मिला सहारा, मातृभाषा तेरी पहचान है
     जिस देश में पल कर बड़ा हुआ,वही तेरा घर

 सुई से वायुयान बने है , साक्षरता तेरी मिशाल है               सोच ने किया फर्क है,ऊँच-नीच में बँटा इन्सान

     सद्ग्रन्थों की भाषा भूली, बँट गए आज धर्म रे  ।
     नभ-धरा का ज्ञान हुआ, तू बन गया डाक्टर इंजीनियर ।
     शक्ति असुर बनी जब -जब, स्वार्थ का महल बना 
     खौफ का चक्र चला कर तू,खुद ही शैतान हुआ।

    भूल -भटक कर घर जो आए , बन जाते इंसान ।
    मन की स्वच्छता हो चित्त में धारण,बन जाए भगवान 
    छोड़ो सब दानवता,मानवता की है पुकार ।
    सद्भावना से खुद बदलो- बदले सारा विश्व जहान
    शांति का साम्राज्य  लाए बने देश महान ।