ALL करंट अफेयर्स राजनीति क्राइम खेल धर्म-संस्कृति हेल्थ खरीदारी-सिफारिश बातचीत सप्तरंग
महामारी में नशे का कारोबार
May 13, 2020 • Naresh Rohila • सप्तरंग

   


    • सुशीला रोहिला   

  वर्तमान समय में मानव जाति पर जो महामारी का कहर बरस रहा है उससे पूरा विश्व अछूता नहीं है । पुरातन काल में मानव हिंसक जानवरों से डरता था लेकिन आज स्थिति महामारी के कारण विपरीत है । मानव एक दूसरे के पास आने या साथ बैठ कर बात-चीत करने या एक दूसरे के नजदीक  आने से डर रहा है । यदि  यह बीमारी घर परिवार में किसी  एक को भी हो जाती  है तो उसके प्रति परिवार वाले उसके पास आते हुए भी डरते है ।  इस भंयकर स्थिति से निपटने के लिए केन्द्र सरकार तथा प्रशासन ने महामारी के रोकथाम हेतु  उपाय भी किए है । 

महामारी में सरकार ने नशे (शराब) का व्यापार क्यों बढ़ाया 
जो शराब  हानिकारक और स्वास्थ्य का सबसे बड़ा  शत्रु माना जा रहा  है और वास्तव यह पदार्थ हानिकारक भी है फिर सरकार से मेरा यह प्रश्न है कि  जगह -जगह मदिरालय खोलने की अनुमति जनता को कैसे प्रदान की । शराब या दूषित पदार्थों का सेवन हमारी नैतिकता, सभ्यता, सांस्कृतिकता, व्यावहारिकता, सदाचार की प्रवृत्ति को ग्रहण लगाता है फिर भी इतनी बड़ी भूल क्यों? 

महामारी की रोकथाम के लिए औषधि के रूप में यदि मद का प्रयोग होता है तो सरकार को सरकारी मदिरालय ही खोलने चाहिए और जनता तथा अन्य  व्यक्तियों के लिए इसकी बिक्री पर पाबंदी लगाना चाहिए था ।  सरकार को केवल औषधि के लिए ही निमित्त मात्र सरकारी मदिरालय ही खोलने चाहिए । आमतौर पर पब्लिक के लिए मद खरादने और पीने पर निषेध करना चाहिए ।

कोरोना महामारी को हराने और इससे छुटकारा  पाने के लिए हमें शंकर भजन और अमृत का पान करना सीखना चाहिए जिससे हम पर महामारी का प्रभाव ना पड़े । आज मानव   समाज को योग  और अध्यात्म की सबसे अधिक आवश्यकता है जो मानव को स्वस्थ  और सुरक्षित रख सकें । एक स्वस्थ समाज ही स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण कर सकता है |