ALL करंट अफेयर्स राजनीति क्राइम खेल धर्म-संस्कृति हेल्थ खरीदारी-सिफारिश बातचीत सप्तरंग
मेरी बात
March 24, 2020 • Naresh Rohila

21 दिन
कोई

रोड़ पर 

ना निकले

नरेश रोहिला/तीन दिन में दूसरी बार जब प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के राष्ट्र के नाम संदेश देने की खबर प्रसारित हुई तो तभी यह अंदेशा हो गया था कि प्रधानमंत्री बेहद बडा ऐलान करने वाले है और हुआ भी वही | प्रधानमन्त्री ने आज रात से पूरे देश में लाकडाउन करने की घोषणा की और कहा कि इस लाकडाउन को कर्फयू ही समझे | प्रधानमन्त्री की इस घोषणा से साफ है कि देश जिस कोरोना संक्रमण की महामारी से जूझ रहा है, वह और गंभीर होती जा रही है जिसका एकमात्र उपचार सिर्फ और सिर्फ आपस में दूरी बनाये रखना है | प्रधानमंत्री ने 22 मार्च को कोरोना से निपटने के लिए सामाजिक दूरी बनाये रखने का आहवान किया था और आज फिर उन्होंने इसी बात पर जोर दिया कि इस महामारी बचाव का एकमात्र उपाय सामाजिक दूरी बनाए रखना है | प्रधानमन्त्री के आज के संदेश में यह साफ तौर सामने आया कि दुनिया के अनेक देशों में, जहां चिकित्सा, स्वास्थ्य की सेवाएं बेहतर मानी जाती है वहां भी इस बीमारी से लडने में मुशिकलें आ रही हैं | कोई दवा, वैक्सीन नहीं है परिणाम रोज लोग मर  रहे हैं | सिर्फ संक्रमण रोकना ही उपाय है और उसका तरीका यही है हर आदमी दूसरे से दूरी बनाकर रखे | ऐसे में इन देशों ने  भी सिर्फ और सिर्फ सामाजिक दूरी का हथियार अपनाया | निश्चित ही ऐसी स्थिति में देश के सामने कोई दूसरा विकल्प नहीं है , सिवाए इसके कि वे कोरोना संक्रमण से बचने और दूसरों को बचाने के लिए खुद को अपने घर तक सीमित कर ले | प्रधानमंत्री ने लोगों से न घबराने की भी अपील की और कहा कि राज्य सरकारों को नागरिकों की हर जरूरत का ध्यान रखने को कहा गया है इसलिए कोई भी परेशान न हो बस शान्तिपूर्वक घर में रहे | घर के बाहर एक लक्ष्मणरेखा खींच ले | वाकई देश दुनिया से कोरोना वायरस की जो खबरें आ रही हैं, वे बेहद डरावनी है | अभी तक दुनिया भर में 15000 से अधिक लोग मारे जा चुके है | भारत में यह संक्रमण बढता जा रहा है | पांच सौ से अधिक मरीज सामने आ चुके  है | 10 मौत हो चुकी है और यह संख्या लगातार बढ रही है | संक्रमण की चेन को तोडने के लिए सिर्फ बचाव ही एक उपाय  है और वह यह कि कोई भी घर बाहर न निकले  | कोई रोड,पर न जाये | अफवाहों पर जाये और महामारी की गंभीरता को समझे |

अब सवाल यह उठता है कि यह 21दिन कटेंगे कैसे | देश में  करोडो लोग ऐसे है जिनके घर चूल्हा तभी जलता है जब आदमी  कमाकर शाम को रोटी का सामान लाता है | आखिर ऐसे परिवारों का क्या होगा | लोगों की रोजाना जरूरतों मसलन दूध, सब्जी  और अन्य चीजों की उपलब्धता का प्रश्न भी है | आखिर  कर्फयू जैसे हालात में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बाधित नहीं होगी | इसे लेकर आम जनता में बैचेनी स्वाभाविक है | हालांकि जब प्रधानमन्त्री ने 21 दिन के लाकडाउन का फैसला लिया तो व्यापक तैयारियां, गहन मंथन हुआ होगा क्योंकि इतना बडा ऐतिहासिक फैसला लेना सचमुच आसान काम नहीं है | किसी भी  देेेश केे मुखिया के लिए ऐसा फैैैसला करना सचमुच दिल पर पत्थर रखने जैसा है | प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के लिए भी यह आसान नहीं रहा होगा | चिन्ता की लकीरें प्रधानमन्त्री के चेहरे पर झलक रही हैं लेकिन जब वे देश  कहते हैं कि लोगों के स्वास्थ्य के लिए उनके पास कोई दूसरा रास्ता नही है तो समझा जा सकता है कि देश के मुखिया ने कितनी कठिनाई से यह निर्णय किया होगा | देश की आर्थिक व्यवस्था औंधे मुंह पडी है और इन 21 दिनों में हालात क्या होंगे, कुछ भी कहना मुश्किल है लेकिन कहते हैं कि जान है तो जहान है ,इसलिए अब सिर्फ यही उपाय है कि कोई रोड पर न निकले | घर पर रहे ,स्वस्थ रहे | निश्चित ही स्वस्थ रहेंगे तो तरक्की का रास्ता फिर खुल सकेगा |