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March 20, 2020 • Naresh Rohila • क्राइम

निर्भया को इंसाफ


 नरेश रोहिला / आखिरकार सात साल पहले दिल्ली में एक युवती से हुए बर्बर दुष्कर्म कांड के दोषियों के गले में कानून का फंदा पड ही गया | निर्भया को इंसाफ मिल ही गया | उसके चारों दोषियों  अक्षय,विनय ,मुकेश और पवन को तडके साढे पांच बजे दिल्ली की तिहाड जेल में फांसी दे दी गयी | इससे पहले अन्तिम समय तक दोषियों ने बचने की सारी तिकडमे अपनायी लेकिन कानून ने वही किया जो वास्तव में उसे करना चाहिए था | सचमुच 16 दिसम्बर 2012 की रात की उस स्याह घटना को याद कर आज भी एक सिहरन सी दौड जाती है | उस रात दिल्ली में पैरामेडिकल की एक छात्रा अपने मित्र के साथ घर जाने के एक लोकल बस में चढती है | उसी चलती हुई बस में ड्राइवर,कन्डक्टर सहित चार जने  युवती के साथ बेरहमी से दुष्कर्म की घिनौनी वारदात को अन्जाम देते है | उसके साथी को बांधकर बुरी तरह पीटते है और बाद में दोनों को चलती बस से सुनसान जगह फेंक देते है | इस घटना की शिकार निर्भया की बाद में सिगांपुर के अस्पताल में मौत हो जाती है लेकिन इस बेहद भयावह घटना के बाद पूरे देश की मांग दोषियों को सिर्फ फांसी दिये जाने की होती है |महीनों तक चले जनान्दोलन के बाद गठित जस्टिस वर्मा कमेटी भी महिलाओं के खिलाफ होने वाले मामलों दोषियों को कडी से कडी सजा देने की सिफारिश करती है | विशेष रूप से दुष्कर्म के रेयर और रेयरिस्ट मामलों में दोषियों को मौत की सजा देने के भी सिफारिश की जाती है | इसके अलावा कई अन्य सिफारिश भी जस्टिस वर्मा कमेटी करती है | देखा जाये तो इन सिफारिशों के बाद निर्भया को जल्दी इंसाफ मिल जाना चाहिए था परन्तु इसके बाद भी न्याय होने में सात साल का लम्बा समय लग गया तो शायद इसलिए कि भारतीय कानून में स्पष्ट है कि विलम्ब कितना भी हो लेकिन किसी निर्दोष को सजा न हो | मुजरिम को खुद को निर्दोष सिद्ध करने का पूरा मौका भारतीय कानून देता है | निर्भया के दोषियों को भी पूरा समय इसके लिए मिला | उन्होंने पूरी कोशिश की भी लेकिन सच तो यह है कि खुद दोषी और उनके वकील भी यह जानते थे कि उन्होंने गुनाह किया है| यही वजह है कि दोषियों की सारी तिकडमें, दलीलें फिजूल गयी | अन्तत: इंसाफ हुआ | देर हुई लेकिन कह सकते है कि देर आयद दुरूस्त आयद | बहरहाल निर्भया के दरिंदों को मिली सजा का संदेश दूर तक जायेगा | निर्भया के दोषियों को फांसी की सजा से समाज में ऐसे आपराधिक तत्वों में भय पैदा हो सकेगा जो जाने - अनजाने इस तरह के अपराधों को अन्जाम देते है | उम्मीद की जानी चाहिए निर्भया के दोषियों को फांसी न्याय के इतिहास में एक मिसाल बनेगी और आने वाले समय में हमारी बहन - बेटियों को सुरक्षित माहौल मिल सकेगा |